Pushp Ki Abhilasha

हिंदी कविता – पुष्प की अभिलाषा (Hindi Poem – Pushp Ki Abhilasha)

हिंदी कविता – पुष्प की अभिलाषा (Hindi Poem – Pushp Ki Abhilasha)

इस कविता में पुष्प बगीचे के माली से कह रहा है कि :
In this poem flower is saying to gardner that :

चाह नहीं, मैं सुरबाला के
गहनों में गूंथा जाऊँ,

हिंदी में भावार्थ / अर्थ : मेरी (फूल की) इच्छा नहीं है कि मैं सुंदर स्त्रियों का गहना बनूँ।
Meaning in English : Don’t want to be part of jewels (makeup) of a woman.

चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध
प्यारी को ललचाऊँ,

हिंदी में भावार्थ / अर्थ : मेरी (फूल की) इच्छा नहीं है कि मैं प्रेमी की माला बनकर प्रेमिका को आकर्षित करूँ।
Meaning in English : Don’t want to be a part of garlands to attract lovers.

चाह नहीं सम्राटों के शव पर
हे हरि डाला जाऊँ,

हिंदी में भावार्थ / अर्थ : मेरी (फूल की) इच्छा नहीं है कि मुझे राजाओं के मृत शरीर पर भगवान का नाम लेकर डाला जाये।
Meaning in English : Don’t want to showered on dead bodies of kings and emperors.

चाह नहीं देवों के सिर पर
चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ।

हिंदी में भावार्थ / अर्थ : मेरी (फूल की) इच्छा नहीं है कि मुझे भगवान की मूर्तियों पर चढ़ाया जाए और में इसपर अपने को भाग्यशाली मानकर घमंड (इठलाऊँ) महसूस करूँ।
Meaning in English : Don’t want to be on the head of deities and feel proud.

मुझे तोड़ लेना वनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक!

हिंदी में भावार्थ / अर्थ : ओ माली , मुझे (पुष्प को) तोड़ कर उस रास्ते (पथ) पर फेंक देना,
Meaning in English : You just pluck me o gardener and throw me on the way,

मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने,
जिस पथ पर जावें वीर अनेक।

हिंदी में अर्थ / भावार्थ : जिस रास्ते (पथ) पर वीर पुरुष अपनी मातृभूमि पर बलिदान होने जाते हैं।
Meaning in English : Where martyrs go to sacrifice their head for their motherland.

– माखनलाल चतुर्वेदी (Makhanlal Chaturvedi)

माखनलाल चतुर्वेदी जी के बारे में और अधिक जानने के लिए विकिपीडिआ देखें।
Please see Wikipedia to know more about poet Makhanlal Chaturvedi.

कविता का सारांश :

इस कविता का सारांश यह है कि , एक पुष्प जिसका प्राकृतिक इस्तेमाल , सुन्दर स्त्रियों पर सुशोभित होना , प्रेमिकाओं के गले की माला बनना , भगवानों की मूर्तियों पर चढ़ाया जाना और सम्राटों के शव पर  डाला जाना है। वह पुष्प इस सब को छोड़ कर अपने आप को देश पर बलिदान होने वालों पर डालने के लिए माली से अपनी इच्छा प्रकट कर रहा है। इस कविता में कवि ने देश भक्ति की भावना जगाने की कोशिश की है।

प्रश्न उत्तर (Question Amswer) :

प्रश्न (Question): इस कविता के रचयिता (Poet) कौन हैं ?
उत्तर (Answer): इस कविता के रचयिता माखनलाल चतुर्वेदी हैं।

प्रश्न (Question): पुष्प की अभिलाषा क्या है ?
उत्तर (Answer): पुष्प की अभिलाषा मातृभूमि पर बलिदान होने वाले वीरों पर चढ़ाया जाना है।

प्रश्न (Question): पुष्प की अभिलाषा क्या नहीं है ?
उत्तर (Answer): पुष्प की अभिलाषा सुन्दर स्त्रियों पर सुशोभित होना , प्रेमिकाओं के गले के माला बनना , भगवानों की मूर्तियों पर चढ़ाया जाना और सम्राटों के शव पर डाला जाना नहीं है।

प्रश्न (Question): पुष्प अपनी अभिलाषा किस पर प्रकट कर रहा है ?
उत्तर (Answer): पुष्प अपनी अभिलाषा बाग के माली पर प्रकट कर रहा है।

प्रश्न (Question): इस कविता के माध्यम से कवि क्या सन्देश देना चाहता है ?
उत्तर (Answer): इस कविता के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है की वीरों का मातृभूमि पर किया गया अपने प्राणों का बलिदान सर्वोपरि है। यह बात कवि ने एक फूल के माध्यम से कहने की कोशिश की है। जिसमें एक फूल भी अपने आप को वीरों पर चढ़ाया जाना सबसे अधिक श्रेयस्कर मानता है।

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